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प्रौढ़ शिक्षा

जन शिक्षण संस्‍थान

जन शिक्षण संस्‍थानों की स्‍थापना गैर-साक्षर, अर्द्ध साक्षर और स्‍कूल छोड़ने वालों को व्‍यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान करने हेतु उनकी संस्‍थापना बाजार क्षेत्र के संभाव्‍य कौशलों की पहचान द्वारा की जाती है।

कार्य का क्षेत्र

जन शिक्षण संस्‍थानों (जे एस एस) के कार्य क्षेत्र में निम्‍नलिखित शामिल होंगे :

  • व्‍यावसायिक कारकों, सामान्‍य जागरूकता और जीवन संपन्‍नता घटकों को शामिल करते हुए उपयुक्‍त पाठ्यचर्या और प्रशिक्षण मॉड्यूलों का विकास/स्रोत।
  • जहां भी संभव हो, जे एस एस को प्रौढ़ शिक्षा निदेशालय, राष्‍ट्रीय मुक्‍त विद्यालयीय संस्‍थान और महानिदेशक, रोजगार एवं प्रशिक्षण द्वारा निरूपित पाठ्यक्रमों के समतुल्‍य प्रशिक्षण शुरू करने के लिए प्रोत्‍साहित किया जाता है।
  • प्रशिक्षण के आयोजन और अवसंरचना तथा प्रशिक्षण विशिष्‍ट उपकरण की उपलब्‍धता के लिए संसाधन व्‍यक्तियों और मास्‍टर प्रशिक्षकों के पूल को प्रशिक्षण प्रदान करना।
  • साधारण परीक्षाओं का प्रशासन और प्रमाणपत्र प्रदान करना।
  • प्रशिक्षुओं के उपयुक्‍त नियोजन के लिए कर्मचारियों और उद्योगों के साथ नेटवर्क।

जन शिक्षण संस्‍थानों (जे एस एस) का वर्गीकरण

जन शिक्षण संस्‍थानों (जे एस एस) को तीन श्रेणियों, नामत: श्रेणी 'क', श्रेणी 'ख' और श्रेणी 'ग' में वर्गीकृत किया गया है। प्रत्‍येक श्रेणी के लिए सहायता की अलग मात्रा का प्रावधान किया गया है।

वित्तीय सहायता का प्रतिमान

01.04.09 से सभी जे एस एस को इस प्रकार संशोधित दर से वर्द्धित* सहायता प्रदान की जाएगी :

बजट शीर्ष श्रेणी ''क''
(रु. लाख)
श्रेणी ''ख''
(रु. लाख)
श्रेणी ''ग''
(रु. लाख)
परिलब्धियां 16 15 13
कार्यक्रम 19 15 13
कार्यालय व्‍यय 5 5 4
आवर्ती (कुल ) 40 35 30
अनावर्ती (अवसंरचना और उपकरणों के लिए) : केवल नए जे एस एस को 15 लाख रु. का एकमुश्‍त अनुदान

निगरानी एवं मूल्‍यांकन

प्रौढ़ शिक्षा निदेशालय, स्‍कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार सभी एस आर सी के नियोजन, निगरानी, मूल्‍यांकन और क्षमता निर्माण का उत्‍तरदायी होगा।

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