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पुस्‍तक संवर्धन

अनुप्रयोग

सामान्‍य

प्रत्‍येक प्रकाशक द्वारा प्रत्‍येक शीर्षक अथवा शीर्षक के संस्‍करण को एक पृथक आईएसबीएन आबंटित किया जाना चाहिए परन्‍तु उसी प्रकाशक द्वारा उसी फार्मेट में उसी शीर्षक के अपरिवर्तित संस्‍करण अथवा अपरिवर्तित पुनर्मुद्रण हेतु नहीं। संशोधित संस्‍करणों हेतु नए आई.एस.बी.एन. की आवश्‍यकता होती है। नए आई.एस.बी.एन के लिए मूल्‍य में परिवर्तन की आवश्‍यकता नहीं होती है। फार्मेट में परिवर्तन से नए आईएसबीएन की जरूरत होती है। एक ही शीर्षक को श्रृंखला में तथा पृथक रूप में प्रकाशित किए जाने पर दो अलग-अलग संस्‍करण माना जाता है।

प्रतिकृति (फैक्सिमाइल) पुनर्मुद्रण

किसी अलग प्रकाशक द्वारा तैयार प्रतिकृति पुनर्मुद्रण को एक पृथक आईएसबीएन आबंटित किया जाना चाहिए।

अलग-अलग रचना स्‍वरूपों का प्रकाशन

एक प्रकाशन के अलग-अलग रचना स्‍वरूपों (उदाहरण के लिए हार्डबैक, पेपर बैक, ब्रैल, आडियो पुस्‍तक, आनलाइन इलैक्‍ट्रानिक प्रकाशन) के लिए पृथक आईएसबीएन आवश्‍यक है। जहां पर इलैक्‍ट्रानिक प्रकाशनों को भिन्‍न-भिन्‍न फार्मेटों (उदाहरण के लिए: एल.आई.टी, पीडीएफ, एचटीएमएल, पीडीबी) में उपलब्‍ध कराया जाता है वहां प्रत्‍येक उपलब्‍ध फार्मेट हेतु एक अलग किस्‍म का आईएसबीएन आबंटित किया जाना चाहिए।

लूज-लीफ प्रकाशन

यदि कोई प्रकाशन लूज-लीफ स्‍वरूप में प्रकाशित होता है तो एक निर्धारित समय पर एक संस्‍करण की पहचान हेतु एक आईएसबीएन आबंटित किया जाएगा। संस्‍करणों के अलग-अलग अंकों अथवा प्रतिस्‍थापन- शीटों को भी यदि अलग से स्‍टॉक किया जाता है तो उन्‍हें भी एक आईएसबीएन दिया जाएगा।

बहु-खंड कृतियां

किसी बहु-खंड कृति के सभी खंडों के सम्‍पूर्ण सैट को एक आईएसबीएन आबंटित किया जाना चाहिए; तथा यदि सैट के अलग-अलग खंडों को अलग-अलग बेचा जाता है तो इसे अपना स्‍वयं का आईएसबीएन आबंटित किया जाना चाहिए। इस प्रकार एक खंड पर अलग कार्रवाई करना तथा उसे बेचना संभव हो जाता है। अत: जब भी बहु-खंड कृतियों को एक सैट के रूप में बेचा जाता है, तो प्रत्‍येक खंड को आईएसबीएन आबंटित करना उपयुक्‍त होगा: इससे वापसी (क्षतिपूर्ण खंडों) तथा ऐसे शिपमेंट को नियंत्रित करने की सुविधा मिलती है जब एक समय पर सभी खंडों को प्रकाशित अथवा वितरित नहीं किया जाता है।

बैकलिस्‍ट

प्रत्‍येक प्रकाशक के लिए सभी बैकलिस्‍ट प्रकाशनों को क्रम संख्‍या देना अपेक्षित है तथा आईएसबीएन को सूची पत्रों में प्रकाशित करना अपेक्षित है। बैकलिस्‍ट शीर्षक के प्रथम उपलब्‍ध पुनर्मुद्रण में भी आईएसबीएन अवश्‍य मुद्रित किया जाना चाहिए।

सहयोगात्‍मक प्रकाशन

अन्‍य प्रकाशकों के साथ मिलकर किसी सह-संस्‍करण अथवा संयुक्‍त मुद्रण को वितरण के प्रभारी प्रकाशक द्वारा आईएसबीएन आबंटित किया जाता है। अन्‍य सह-प्रकाशक यदि चाहें तो अपना आईएसबीएन आबंटित कर सकते हैं।

एजेंटों द्वारा बेची तथा वितरित की जानी वाले पुस्‍तकें

((क को छोड़कर) यह केवल उन देशों पर लागू होता है जो अभी तक प्रणाली में भाग नहीं ले रहे हैं)

  • जैसाकि आईएसबीएन मानक में उल्‍लेख है, किसी विशिष्‍ट प्रकाशक द्वारा प्रकाशित, किसी विशिष्‍ट संस्‍करण को केवल एक ही आईएसबीएन दिया जा सकता है। पुस्‍तक को चाहे कहीं भी किसी के भी द्वारा वितरित अथवा बेचा जाता है। आईएसबीएन वही रहेगा।
  • ऐसे किसी क्षेत्र में जो आईएसबीएन प्रणाली में शामिल नहीं है, किसी विशिष्‍ट वितरक अथवा एकमात्र एजेंट द्वारा आयातित कोई ऐसी पुस्‍तक तथा जिसे कोई आईएसबीएन आबंटित नहीं किया गया है, को विशिष्‍ट वितरक द्वारा आईएसबीएन आबंटित किया जा सकता है।
  • किसी विशिष्‍ट वितरक अथवा एकमात्र एजेंट द्वारा आयातित ऐसी पुस्‍तकें जिनमें वास्‍तविक प्रकाशक के शीर्षक पृष्‍ठ के स्‍थान पर विशिष्‍ट वितरक की छाप वाला एक नया शीर्षक पृष्‍ठ जोड़ा जाता है, तो उसे विशिष्‍ट वितरक अथवा एकमात्र एजेंट द्वारा नया आईएसबीएन दिया जाना चाहिए। वास्‍तविक प्रकाशक का आईएसबीएन भी दिया जाना चाहिए।
  • ऐसे किसी क्षेत्र जो आईएसबीएन प्रणाली में शामिल नहीं है, में कई वितरकों द्वारा आयातित ऐसी पुस्‍तक जिसे आईएसबीएन आबंटित नहीं किया गया है, को उनके वितरण हेतु उत्तरदायी समूह एजेंसी द्वारा आईएसबीएन आबंटित किया जा सकता है।

एक प्रकाशक का दूसरे प्रकाशक द्वारा अधिग्रहण

किसी प्रकाशन गृह को अधिग्रहित करने वाला कोई प्रकाशक वास्‍तविक आबंटित आईएसबीएन का प्रयोग तब तक जारी रखेगा जब‍तक कि पुस्‍तक को नई कम्‍पनी की छाप के अंतर्गत पुनर्मुद्रित नहीं किया जाता है।

किसी प्रकाशक के संपूर्ण स्‍टॉक का अधिग्रहण

किसी अन्‍य कम्‍पनी के संपूर्ण स्‍टॉक का अधिग्रहण करने वाला प्रकाशक तब तक वास्‍तविक प्रकाशक द्वारा आबंटित आईएसबीएन का प्रयोग जारी रखेगा जब तक कि नई कम्‍पनी पुस्‍तक को अपनी स्‍वयं की छाप के अंतर्गत पुनर्मुद्रित नहीं करती है।

एक से अधिक प्रकाशन के स्‍थान वाले प्रकाशक

  • कोई ऐसा प्रकाशक जो कई स्‍थानों से संचालन कर रहा है जिन्‍हें पुस्‍तक की छाप में एक साथ सूचीबद्ध किया गया है, उस पुस्‍तक को एक ही आईएसबीएन आबंटित किया जाएगा।
  • कोई ऐसा प्रकाशक जो अलग से कार्य करता है तथा जिसकी भिन्‍न-भिन्‍न स्‍थानों पर अलग-अलग कार्यालय अथवा शाखाएं हैं प्रकाशक प्रत्‍येक कार्यालय अथवा शाखा हेतु अलग-अलग पहचान रख सकता है। तथापि, प्रत्‍येक प्रकाशित पुस्‍तक को केवल एक ही आईएसबीएन आबंटित किया जाएगा। आईएसबीएन का आबंटन प्रकाशन हेतु उत्तरदायी कार्यालय अथवा शाखा द्वारा किया जाएगा।

आईएसबीएन के लिए रजिस्‍टर

सभी प्रकाशकों का उत्तरदायित्‍व है कि वे प्रकाशित अथवा आने वाली पुस्‍तकों को आबंटित आईएसबीएन के शीर्षक पंजीकरण के रख-रखाव हेतु उत्तरदायी अपनी ग्रुप एजेंसी अथवा संगठन को सूचित करें। यदि प्रकाशक यह जिम्‍मेदारी नहीं लेता है तो, शीर्षक पंजीकरण के रख-रखाव हेतु उत्तरदायी एजेंसी अथवा संगठन को अपनी ओर से ही इस प्रकाशक के आईएसबीएन रजिस्‍टर के रख-रखाव का अधिकार प्राप्‍त है।

आईएसबीएन का कभी भी पुन: उपयोग नहीं किया जा सकता है

कोई आईएसबीएन एक बार आबंटित किए जाने के पश्‍चात किसी भी स्थिति में उसका पुन: उपयोग नहीं किया जा सकता है। अव्‍यवस्‍था से बचने के लिए यह अत्‍यंत जरूरी है। यदि, किसी लेखन-अशुद्धि के द्वारा, कोई संख्‍या गलत आबंटित हो जाती है, तो संख्‍या को उपयोग योग्‍य संख्‍याओं से अवश्‍य ही हटाया जाना चाहिए तथा उसे किसी दूसरे शीर्षक को आबंटित नहीं किया जाना चाहिए। प्रकाशक को ग्रुप एजेंसी को हटाई गई संख्‍याओं तथा उन शीर्षकों की जानकारी देनी चाहिए जिन्‍हें वे गलती से आबंटित किए गए थे।

इलैक्‍ट्रानिक प्रकाशनों हेतु आईएसबीएन

आईएसबीएन इलैक्‍ट्रानिक प्रकाशनों पर भी लागू होता है:

  • ऑफलाइन मदों, जैसे फ्लापी डिस्‍कों तथा सी. डी. -रोम को अन्‍य प्रकाशनों की तरह माना जाता है।
  • ऑनलाइन मद इंटरनेट पर पाठ्यपुस्‍तक जैसे पूर्ण तथा तैयार प्रकाशन हो सकते हैं। इस मामले में एक आई.एस.बी.एन. ही पर्याप्‍त है।
  • एक ऑनलाइन प्रकाशन कोई ग्रंथ-सूची अथवा तथ्‍य डाटाबेस हो सकता है जो किसी भी समय परिवर्तित हो सकता है। यह एक ऐसे विश्‍वकोश अथवा शब्‍दकोश के सामान हो सकता हे जो प्रत्‍येक शीर्षक संशोधन के बिना अन्‍य मीडिया में निरंतर अद्यतन होते रहते है, जो नए संस्‍करण अथवा नए आईएसबीएन का कारण हो सकते हैं। केवल महत्‍वपूर्ण तथा/अथवा ढांचागत परिवर्तनों (शीर्षक परिवर्तन सहित) से ही नए आई.एस.बी.एन. की आवश्‍यकता होगी।
  • लिंक्‍ड सामग्री (उदाहरण के लिए हायपरटैक्‍स्‍ट) को केवल तभी उसी आई.एस.बी.एन. के तहत शामिल माना जाएगा यदि संबंधित सामग्री वास्‍तव में प्रकाशन का हिस्‍सा है।
  • यदि कोई ऑनलाइन प्रकाशन विभिन्‍न आपरेटिंग सिस्‍टमों तथा/अथवा कमांड लैंग्‍वैजों के अंतर्गत हैं तो प्रत्‍येक << संस्‍करण >> हेतु अलग आई.एस.बी.एन. की आवश्‍यकता होगी।

पात्र साफ्टवेयर उत्‍पादों हेतु आई.एस.बी.एन

किसी विशिष्‍ट साफ्टवेयर की पहचान के लिए आई.एस.बी.एन. का उपयोग होता है। यदि एक से अधिक संस्‍करण हैं (विभिन्‍न मशीनों, कैरियर मीडिया अथवा भाषा संस्‍करण हेतु अनुकूलित संस्‍करण) तो प्रत्‍येक संस्‍करण हेतु एक अलग आई.एस.बी.एन. होना चाहिए।

  • जब किसी साफ्टवेयर उत्‍पाद को अद्यतन, सुधारा अथवा संशोधित किया जाता है तथा परिवर्तन उत्‍पाद को नया संस्‍करण माने जाने के लिए पर्याप्‍त हैं, तो नया आई.एस.बी.एन. अवश्‍य ही आबंटित किया जाना चाहिए।
  • मौजूदा उत्‍पाद को पुन: लांच करना, चाहे वह नई पैकिंग में हो, यदि नए तथा पुराने उत्‍पाद के कार्यनिष्‍पादन में कोई अंतर नहीं है तो, नया आई.एस.बी.एन. न्‍यायोचित नहीं है, तथा मूल आई.एस.बी.एन. का ही उपयोग किया जाना चाहिए।
  • यदि किसी साफ्टवेयर के साथ कोई मैनुअल है जो कि साफ्टवेयर के अनुलग्‍न के रूप में उपयोगी है, तो साफ्टवेयर के संचालित करने से पूर्व मैनुअल की आवश्‍यकता होती है, तथा उन्‍हे एक पैकेज के रूप में बेचा जाता है, तो दोनों मदों को शामिल करने के लिए एक ही आई.एस.बी.एन. आबंटित किया जाना चाहिए।
  • यदि किसी साफ्टवेयर पैकेज में दो अथवा अधिक मदों को अलग-अलग इस्‍तेमाल किया जा सकता है, अथवा अलग-अलग तथा साथ-साथ बेचा जा सकता है, तो पूरे पैकेज का एक आई.एस.बी.एन. होना चाहिए।
  • पैकेज में प्रत्‍येक मद का एक आई.एस.बी.एन. होना चाहिए।

किसी साफ्टवेयर उत्‍पाद को उसके वास्‍तविक स्‍वरूप (उदाहरण के लिए यदि कोई साफ्टवेयर किसी रिमोट डाटाबेस से उपलब्‍ध है ज‍हां से उपभोक्‍ता द्वारा उसे डाउनलोड किया जाता है) से स्‍वतंत्र रूप से आई.एस.बी.एन. आबंटित किया जाना चाहिए।

उत्‍पाद का पता लगाने के साथ-साथ, आई.एस.बी.एन. निर्माता या निर्माणकर्ता की भी पहचान करता है, इसका प्रयोग उत्‍पाद के वितरक अथवा थोक विक्रेता की पहचान हेतु नहीं किया जाना चाहिए।

आई.एस.बी.एन. का मुद्रण

सामान्‍य

आई.एस.बी.एन. मद पर प्रदर्शित होना चाहिए। यह प्रणाली के कारगर ढंग से चलने के लिए आवश्‍यक है।

आई.एस.बी.एन. अवश्‍य ही दिखाई दिया जाना चाहिए।

  • शीर्षक पृष्‍ठ (प्रतिलिप्‍यधिकार पृष्‍ठ) के पीछे
  • बाहरी बैक कवर के निचले सैक्‍शन पर
  • यदि कहीं और कोई जगह नहीं है तो शीर्षक पृष्‍ठ के निचले भाग में
  • बैक डस्‍ट जैकेट, अथवा किसी अन्‍य रक्षात्‍मक केस अथवा रैपर के निचले तल पर
  • पीठ के तल पर (केवल यदि उत्‍पाद एक पैपरबैक पुस्‍तक है)
  • कंटेनर के लेबल पर, यदि प्रकाशन उसमें जारी किया गया है (कैसेट, डिस्‍कैट, सी-डी रोम आदि)
  • शीर्षक डिस्‍प्‍ले पर, अथवा प्रथम डिस्‍प्‍ले पर (सी.डी. रोम, इंटरनेट प्रकाशन)
  • क्रेडिट शीर्षक पर (फिल्‍म, वीडियो)

आई.एस.बी.एन. को सदैव आसानी से पढ़े जा सकने वाले टाईप बड़े आकार में मुद्रित किया जाना चाहिए (अर्थात 9 प्‍वाईंट या अधिक)

बार कोड फार्म में आई.एस.बी.एन.

बार कोड स्‍कैन के तीव्रता से विश्‍व‍व्‍या‍पी विस्‍तार से ई.ए.एन. इंटरनेशनल (ई.ए.एन.), यूनीफार्म कोड काउंसिल (यूसीसी) तथा अंतर्राष्‍ट्रीय आई.एस.बी.एन. और अंतर्राष्‍ट्रीय आई.एस.बी.एन. एजेंसी के बीच सहमति सुस्‍पष्‍ट हुई है, जो आई.एस.बी.एन. को ई.ए.एन.-13 बार कोड में एनकोड करने की अनुमति देता है। यह आई.एस.बी.एन. को विश्‍वव्‍यापी बार कोडिंग स्‍कीम के अनुरूप अंतर्राष्‍ट्रीय आईडेंटीफायर बनाता है।

आई.एस.बी.एन. को ई.ए.एन.-13 बार कोड प्रतीकशास्‍त्र में आई.एस.ओ./आई.ई.सी. (बार कोड प्रतीकशास्‍त्र विनिर्देशन ई.ए.एन./यू.पी.सी.) के अनुरूप दर्शाया जाना चाहिए जिसके लिए ई.ए.एन.-13 प्रतीकों का उपयोग ई.ए.एन. तथा यू.सी.सी. की सिफरिशों के अनुरूप करने की आवश्‍यकता होती है। एक ई.ए.एन. बार कोड में तेरह अंक होते है।

ई.ए.एन.-13 बार कोड प्रतीक में एनकोडेड आई.एस.बी.एन. का एक उदाहरण नीचे दर्शाया गया है:

ISBN 978-1-873671-00-9

बार कोड में इस्‍तेमाल किए जाने पर आई.एस.बी.एन. को ''आई.एस.बी.एन.'' के पश्‍चात् ई.ए.एन.-13 बार कोड प्रतीक के ठीक ऊपर व्‍यक्तियों द्वारा पठनयोग्‍य रूप में दर्शाया जाना चाहिए।

ई.ए.एन.-13 बार कोड को शुरू करने तथा इसके उपयोग संबंधी और जानकारी आई.एस.बी.एन. ग्रुप एजेंसी तथा अंतर्राष्‍ट्रीय आई.एस.बी.एन. एजेंसी द्वारा उपलब्‍ध कराई जाती है। ग्रुप एजेंसियों को राष्‍ट्रीय तथा अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर सीधे ई.ए.एन संगठनों के साथ सहयोग करने के लिए प्रोत्‍साहित किया जाता है।

प्रकाशनों हेतु ई.ए.एन-13 बार कोड प्रतीक की अनुशंसित स्थिति पिछली ओर स्‍पाईन के निकट निचला दायां पाद भाग है।

ग्रुप/राष्‍ट्रीय एजेंसी के कार्य

  • अपने क्षेत्र में आई.एस.बी.एन. प्रणाली में भागीदारी को प्रोत्‍साहित करना।
  • ग्रुप के मामलों का प्रबंधन तथा अभिशासन।
  • प्रकाशकों तथा उनकी प्रतिनिधि एजेंसियों के साथ सहयोग से अपेक्षित प्रकाशक आईडेंटिटीफायरों की श्रेणी पर निर्णय लेना।
  • पात्र प्रकाशकों को प्रकाशक आईडेंटिटीफायर आबंटित करना तथा प्रकाशकों और उनके आईडेंटिटीफायरों का रजिस्‍टर रखना।
  • प्रकाशकों तथा उनकी प्रतिनिधि एजेंसियों के साथ परामर्श से निर्णय लेना कि कौन से प्रकाशन अपने शीर्षकों को स्‍वयं संख्‍याएं आबंटित करेंगे, तथा उनके किन शीर्षकों को ग्रुप एजेंसी द्वारा संख्‍याएं आबंटित की जाएंगी।
  • प्रकाशकों को प्रणाली के सही तथा उपयुक्‍त कार्यान्‍वयन पर सलाह देना।
  • आई.एस.बी.एन. मानक के उचित कार्यान्‍वयन को सुनिश्चित करने के लिए सामग्रियां तथा संसाधन उपलब्‍ध कराना।
  • अपनी पुस्‍तकों पर स्‍वयं संख्‍या डालने वाले प्रकाशकों को पहले से परिकलित अंकों की जांच के साथ आई.एस.बी.एन. के कम्‍प्‍युटर प्रिंट आउट उपलब्‍ध कराना।
  • प्रकाशकों को उनके द्वारा आबंटित किसी अवैध अथवा डुप्‍लीकेट आई.एस.बी.एन. की जानकारी देना।
  • प्रकाशकों को तकनीकी सलाह तथा सहायता उपलब्‍ध कराना तथा सुनिश्चित करना कि ग्रुप में मानकों तथा अनुमोदित प्रक्रियाओं का अनुपालन किया जाए।
  • बुकलैंड ई.ए.एन. बार कोड फार्मेट को प्रोत्‍साहित करना तथा बढ़ावा देना।
  • बुक लिस्टिंग तथा ग्रंथ सूचीय एजेंसियों के साथ शीर्षकों की उपयुक्‍त लिस्टिंग हेतु आई.एस.बी.एन. के महत्‍व को प्रोत्‍साहित करना तथा बढ़ावा देना।
  • पुस्‍तक उद्योग के सभी अवयवों के साथ संपर्क रखना तथा नए प्रकाशकों को प्रणाली में शामिल करना।
  • To assist the book industry in the use of the ISBN in computer systems.
  • कम्‍प्‍यूटर प्रणालियों में आई.एस.बी.एन. के प्रयोग हेतु पुस्‍तक उद्योग को सहायता देना।
  • ग्रुप के सभी प्रकाशकों की ओर से अंतर्राष्‍ट्रीय आई.एस.बी.एन. एजेंसी के साथ संबंधों पर कार्रवाई करना। आबंटित प्रकाशक आईडेंटिटीफायरों तथा शीर्षक संख्‍या की फाइलों को रखना तथा उपलब्‍ध कराना। यदि राष्‍ट्रीय ग्रंथ-सूची परवर्ती कार्य को पूरा करती है तो एजेंसी को इस प्रयास को दोहराने की आवश्‍यकता नहीं है।
  • नियमित रूप से अंतराष्‍ट्रीय आई.एस.बी.एन. एजेंसी को रिपोर्ट करना।