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पुस्‍तक संवर्धन

कार्यकरण

विश्‍व भर में 160 से अधिक देशों में मान्‍यता प्राप्‍त, अंतर्राष्‍ट्रीय मानक पुस्‍तक संख्‍या एक लधु और स्‍पष्‍ट पहचान संख्‍या है, जो संभवत मशीन-पठित है। आईएसबीएन एक विशेष मोनोग्रफिक प्रकाशन को अनुपम ढंग से से निर्दिष्‍ट करता है और इसलिए इसे उत्‍पादन के आरंभिक स्‍तर से ही साथ होना चाहिए। पुस्‍तक व्‍यापार में उत्‍पादन,वितरण,विक्रय विश्‍लेषण तथा संदर्भिका द्वारा भंडारण प्रणाली में अनिवार्य उपकरण होते हुए, आईएसबीएन पुस्‍तकालय सूचना प्रबंधन में भी अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण है।

मोनोग्राफिक प्रकाशनों ओर सर्वसाधारण के लिए उपलब्‍ध कुछ प्रकार के संबंधित उत्‍पाद, चाहे वे प्रकाशन और संबं‍धित उत्‍पाद निशुल्‍क अथवा खरीद के आधार पर उपलब्‍ध हों, को आईएसबीएन दिया जाता है। इसके अतिरिकत, मोनोग्राफिक प्रकाशनों के (व्‍यक्तिगत खंड जैसे अध्‍याय) अथवा अंक अथवा सतत संसाधनों के लेख जो अनग से उपलब्‍ध कराये जाते हें, पहचान के रूप में आईएसबीएन का प्रयोग कर सकते हैं। विभिन्‍न उपलब्‍ध मीडिया के संबंध में, यह महत्‍वपूर्ण नहीं है कि किसी भौतिक रूप में विषयवस्‍तु को लेखबद्व और वितरित किया गया है, हालांकि, प्रत्‍येक रूप को अलग-अलग पहचानित किया जाना चाहिए।

कुछ प्रकार के मोनोग्राफिक प्रकाशनों के कुछ उदाहरण जिन्‍हें आईएसबीएन दिया जाना चाहिए:

  • मुद्रित पुस्‍तकें तथा पम्‍पलेट
  • ब्रेल प्रकाशन
  • प्रकाशन जिन्‍हें प्रकाशकों द्वारा नियमित अद्यतन अथवा अनिश्‍चितकाल तक जारी रखने का विचार नहीं है|
  • विशेष सतत संसाधनों के व्‍यक्तिगत लेख अथवा अंक (परंतु संपूर्णत: सतत संसाधन में नहीं)
  • नक्‍शे
  • शैक्षिक/निर्देशात्‍मक फिल्‍में, वीडियो तथा पारदर्शिकाएं
  • कैसेटस अथवा सीडी अथवा डीवीडी (बोलने वाली पुस्‍तकें) पर श्रम पुस्‍तके
  • इलैक्‍ट्रानिक प्रकाशन चाहे भौतिक वाहकों (जैसे मशीन-पठित, टेपों, डिस्‍केटों अथवा सीडी-रोम) अथवा इंटरनेट पर हों