तकनीकी समर्थित शिक्षण

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सिंहावलोकन

आज जिस दर से सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) बढ़ रही है यह इस बात का सबूत है कि इसने हमारे जीवन लगभग सभी पहलुओं को प्रभावित कर दिया है। प्रौद्योगिकी प्रगति विस्‍तार के साथ-साथ शिक्षा की गुणवत्‍ता दोनों की वृद्धि के लिए काम में लाई जा सकती है।

इस दिशा में मौजूदा प्रयास मुख्‍यत: उच्‍चतर शिक्षा संस्‍थाओं को अवसंरचना और नेटवर्क उपलब्‍ध कराने की दिशा में किए जा रहे हैं। विश्‍वविद्यालयों द्वारा डिजिटल साधन विकास और डिजिटल साधन का गुणवत्‍ता प्रमाणित कार्यक्रमों और पाठ्यक्रमों में उपयोग को पूरी तरह से काम में लाने की जरूरत है।

भारत सरकार सभी पात्र छात्रों के लिए उच्‍चतर शिक्षा सुगम बनाने हेतु अपने मिशन की सहायता में तकनीकी संसाधनों का प्रयोग करने की इच्‍छुक है। इस संबंध में प्रत्‍येक भारतीय शिक्षु के हितार्थ देश के सभी शिक्षकों और विशेषज्ञों के सामुहिक ज्ञान को सांझा करने के लिए, ताकि डिलिटल विभाजन कम किया जा सके, अवसर उपलब्‍ध कराने हेतु वर्ष 2009 में आईसीटी के माध्‍यम से राष्‍ट्रीय शिक्षा मिशन की शुरूआत की गई। इस मिशन के अंतर्गत कंटेंट निर्माण, शिक्षा प्रदान करने संबंधी महत्‍वपूर्ण क्षेत्रों में अनुसंधान और अन्‍य देशों में विकास के साथ जोड़ने के लिए कनेक्टिविटी के बीच समुचित संतुलन बनाना जरूरी है। इसके लिए जो जरूरी है वह है समर्पण के साथ एक नेटवर्क में प्रत्‍येक क्षेत्र से विशेषज्ञों का समूह। हालांकि विभिन्‍न संस्‍थाओं/संगठनों द्वारा इस क्षेत्र में अलग-अलग प्रयास किए जा रहे हैं और कहीं-कहीं सफलता भी मिली है, एक व्‍यापक दृष्टिकोण समय की मांग है। यह मिशन इस प्रकार की पहलों की मदद करता है और व्‍यापक दृष्टिकोण अपनाकर विभिन्‍न प्रयासों के बीच एक ताल-मेल बनाता है। यह बिल्‍कुल सही है कि आईसीटी पर बल देनेकी विशेष जरूरत है क्‍योंकि यह गुणवत्‍ता के साथ समझौता किए बिना शैक्षणिक संस्‍थाओं के क्षमता निर्माण प्रयासों के लिए गुणक के रूप में कार्य करता है। मिशन क्षमता निर्माण के जरिए हमारी अर्थव्‍यवस्‍था की उच्‍च वृद्धि दर बनाए रखने, लोगों के ज्ञान सशक्तिकरण और नई उभरती हुई बहु-विषयक ज्ञान क्षेत्रों के प्रोत्‍साहन के लिए भी जरूरी है।