राष्‍ट्रीय माध्‍यमिक शिक्षा अभियान (एकीकृत)

सिंहावलोकन

आरएमएसए 15-16 वर्ष की आयु के सभी युवाओं के लिए अच्‍छी गुणवत्‍तायुक्‍त माध्‍यमिक शिक्षा उपलब्‍ध कराने, उसमें पहुंच बनाने और उसे वहनीय बनाने के उद्देश्‍य से मार्च, 2009 में प्रारंभ की गई मुख्‍य योजना है।

इस योजना का उद्देश्‍य गुणवत्‍ता को सुनिश्चित करते हुए माध्‍यमिक स्‍तर पर गुणवत्‍तायुक्‍त शिक्षा में पहुंच बढ़ाने और इसमें सुधार करना है। योजना में सभी माध्‍यमिक स्‍कूलों के लिए निर्धारित मानकों का निर्धारण करके, महिला-पुरूष, सामाजिक-आर्थिक भेदभाव और नि:शक्‍तता की बाधा को हटाकर, 2017 तक अर्थात् 12वीं पंचवर्षीय योजना के अंत तक और 2020 तक अंतरराष्‍ट्रीय प्रतिधारण को प्राप्‍त करके माध्‍यमिक स्‍तर की शिक्षा में अंतरराष्‍ट्रीय पहुंच प्रदान करना और माध्‍यमिक स्‍तर पर दी जाने वाली शिक्षा की गुणवत्‍ता में सुधार करके कक्षा 9-10 के लिए नामांकन बढ़ाने की परिकल्‍पना की गई है।

वर्ष 2013-14 में केन्‍द्रीय प्रायोजित योजना अर्थात् स्‍कूलों में आईसीटी, बालिका छात्रावास, माध्‍यमिक स्‍तर पर नि:शक्‍तजनों के लिए समावेशी शिक्षा और व्‍यावसायिक शिक्षा का आरएमएसए के तहत समावेशन कर दिया गया था। आरएमएसए के तहत इन योजनाओं के समावेशन से योजनाओं के तहत प्रावधानों का प्रशासनिक सुव्‍यवस्थिकरण और महत्‍वपूर्ण वित्‍तीय बचत हुई। एक तरफ आरएमएसए के तहत निधि की उपलब्धि भी बढ़ी और दूसरी तरफ इन योजनाओं के तहत किए गए हस्‍तक्षेप, सहायता प्राप्‍त स्‍कूलों तक पहुंचे जिसने उच्‍चतर शिक्षा के क्षेत्र को भी कवर किया, इस योजना के आरएमएसए के तहत समावेशन से सहायता प्राप्‍त स्‍कूलों और उच्‍चतर माध्‍यमिक क्षेत्र के समावेशन से आरएमएसए का अभिसरण आधारित कार्यान्‍वयन भी हुआ।

तथापि, अभी तक सहायता प्राप्‍त स्‍कूलों को दिए जाने वाले लाभ, वर्तमान आरएमएसए के प्रावधानों के मुख्‍य घटकों के निषेध और अन्‍य योजनाओं के तहत वर्तमान हस्‍तक्षेपों तक सीमित होंगे, राज्‍य स्‍तर पर अभिसरण से एकीकृत और समावेशी (सहायता प्राप्‍त स्‍कूल और उच्‍चतर माध्‍यमिक कक्षाएं) योजना बन पाएगी और उसका कार्यान्‍वयन हो पाएगा।

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