उच्‍चतर शिक्षा के विषय में

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सिंहावलोकन

उच्चातर शिक्षा विभाग शिक्षा के क्षेत्र में आधारभूत संरचना के समग्र विकास के लिए उत्तारदायी है। एक सुनियोजित योजना के तहत विभाग विश्वं श्रेणी के विश्ववविद्यालयों, कॉलेजों और अन्यभ संस्थारओं के जरिए उच्चयतर शिक्षा में गुणतापूर्ण सुधार और वहां तक पहुंच का विस्तासर का कार्य देखता है। विभाग का ध्येुय, लक्ष्य् और उद्देश्य निम्ना‍नुसार है:

ध्येगय

भारत की मानव संसाधन क्षमता को पूर्ण रूप से समानता और समावेशिता के साथ उच्च तर शिक्षा क्षेत्र में लगाना।

लक्ष्यी

  • सभी पात्र व्यिक्तिरयों को तथा विशेष रूप से कमजोर वर्गों के व्यतक्तिैयों को समानता के साथ उच्च्तर शिक्षा के अधिक अवसर प्रदान करना।
  • वर्तमान में मौजूद क्षेत्रीय और अन्य असंतुलनों को दूर करने के उद्देश्यु से किए जा रहे सार्वजनिक प्रयासों में सहायता के लिए वर्तमान संस्थाकओं को सहायता देकर, नई संस्थारएं स्थांपित करके, राज्य सरकारों एवं गैर-सरकारी संगठनों/सिविल सोसायटी की सहायता करके पहुंच का विस्ता्र करना
  • अनुसंधान और नवप्रवर्तनों को सुदृढ़ करने के लिए नीतियां और कार्यक्रम आरंभ करना और संस्थारओं-सरकारी अथवा प्राइवेट दोनों-को ज्ञान के अग्रणी क्षेत्र में बढ़ने के लिए प्रोत्सा हित करना।
  • अवसंरचना और संकाय में निवेश करके, शिक्षा में सुधारों को बढ़ावा देकर, अभिशासन में सुधार करके तथा अब तक वंचित समुदायों में शामिल करने की दिशा में संस्थाागत पुनर्संरचना करके उच्च तर शिक्षा की गुणता को बढ़ाना।

उद्देश्य

  • शिक्षा प्रदान करने की सभी पद्धतियों में उच्च तर शिक्षा क्षेत्र का विस्ता र करके उच्चंतर शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) 2011-12 तक 15 प्रतिशत, 2016-17 तक 21 प्रतिशत और वर्ष 2020 तक 30 प्रतिशत करना।
  • मौजूदा संस्था्ओं में अतिरिक्ते क्षमता के सृजन, नई संस्थाकओं की स्थािपना तथा राज्यी सरकारों और गैर-सरकारी संगठनों/सिविल सोसायटी को प्रोत्सारहन प्रदान करके उच्चि शिक्षा (तकनीकी, व्यातवसायिक तथा वोकेशनल शिक्षा सहित) के संस्थाचगत आधार का विस्ता र करना।
  • मौजूदा संस्थारओं में अतिरिक्ते क्षमता के सृजन, नई संस्था ओं की स्था‍पना तथा राज्यी सरकारों और गैर-सरकारी संगठनों/सिविल सोसायटीको प्रोत्सा हन प्रदान करके उच्च् शिक्षा (तकनीकी, व्यातवसायिक तथा वोकेशनल शिक्षा सहित) के संस्था्गत आधार का विस्ता र करना।
  • सामाजिक रूप से लाभवंचित समुदायों को उच्च‍ शिक्षा के अवसर प्रदान करना तथा महिलाओं, अल्पचसंख्योकों और विकलांग व्य क्तिरयों को शामिल करते हुए उनके संवर्धन द्वारा भेदभाव को दूर करना।
  • असेवित तथा अल्पोसेवित क्षेत्रों में संस्थालओं की स्थायपना द्वारा उच्चल शिक्षा तक पहुंच में क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करना।
  • उच्चय अधिगम संस्थााओं में अवसंरचना तथा संकाय विकास हेतु योजनागत सहायता में वृद्धि करना तथा प्रतिभाओं को शिक्षण एवं शोध में कैरियर के लिए आकर्षित करना।
  • विश्वनविद्यालयों तथा कॉलेजों में बढ़ी हुई शोध सुविधाओं के माध्यतम से ज्ञान अर्जन हेतु स्थिवति पैदा करना।
  • सर्वसुलभ ज्ञान की उन्न।ति तथा बौद्धिक संपदा अधिकारों के लिए अंतर्राष्ट्रीसय समुदाय, विदेशी सरकारों, विश्व विद्यालयों/संस्थाजओं तथा क्षेत्रीय एवं अंतर्राष्ट्री य संस्थाथओं के साथ सहयोग का संवर्धन करना।
  • भारतीय भाषाओं के विकास का संवर्धन करना।
  • उच्ची अधिगम संस्थासओं में स्वाियत्ताद, नवाचार, शैक्षिक सुधारों का संवर्धन करना।
  • उच्ची शिक्षा में सक्षमता, संगतता तथा सृजनात्मलकता सुधार के लिए संस्थाैगत पुन: अवसंरचना तैयार करना।

कार्यकलाप

  • सभी तरीकों के द्वारा पहुंच का विस्ता,र करके सकल नामांकन अनुपात में वृद्धि करना।
  • समाज के उन वर्गों की भागीदारी का संवर्धन करना जिनका सकल नामांकन अनुपात राष्ट्री य औसत से कम है।
  • गुणवत्ताट में सुधार करना तथा शैक्षिक सुधारों का संवर्धन करना।
  • नई शैक्षिक संस्थााओं की स्थारपना करना तथा मौजूदा संस्थारओं का क्षमता विस्ताैर तथा सुधार करना।
  • उच्चर शिक्षा में प्रौद्योगिकी उपयोग।
  • व्यारवसायिक शिक्षा तथा कौशल विकास का विस्ताथर ।
  • भारतीय भाषाओं का विकास।
  • शिक्षा के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग