बालिका छात्रावास

माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्कूलों में छात्राओं के लिए बालिका छात्रावास का निर्माण और उनका संचालन

प्रस्तावना

यह 2008-09 में प्रारंभ की गई एक नई केंद्र प्रायोजित योजना है और देश में 3479 शैक्षिक रूप से पिछड़े ब्लॉकों (ईबीबी) में से प्रत्येक ब्लॉक में 100 बिस्तर वाले बालिका छात्रावास की स्थापना हेतु 2009-10 से क्रियान्वित की जा रही है। इस योजना को गैर-सरकारी संगठनों द्वारा पूर्व में संचालित माध्यमिक तथा उच्चतर माध्यमिक स्कूलों के छात्रों के लिए बालिका छात्रावासों के निर्माण तथा संचालन की योजना के स्थान पर लागू किया गया है जिसके तहत बालिका छात्रावासों के संचालन हेतु स्वैच्छिक संगठनों को सहायता प्रदान की जाती थी।

उद्देश्य

माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक कक्षाओं में बालिकाओं की पहुंच और उनके प्रतिधारण में सुधार करना ताकि बालिकाओं को स्कूल की दूरी, अभिभावकों की वित्तीय क्षमता तथा अन्य संबंधित सामाजिक कारणों से अपनी पढ़ाई जारी रखने के अवसर से वंचित न रहना पड़े। इस योजना का अन्य उद्देश्य माध्यमिक तथा वरिष्ठ माध्यमिक शिक्षा को बालिका छात्रों की बड़ी संख्या के लिए उपलब्ध करवाना है।

लक्षित समूह

अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक समुदाय और गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों की कक्षा 9 से 12 में पढ़ने वाली 14-18 वर्ष के आयु समूह की छात्राएं योजना का लक्षित समूह है। छात्रावासों में दाखिले के लिए केजीबीवी से उत्तीर्ण छात्राओं को वरीयता दी जाएगी। कम से कम 50 प्रतिशत छात्राएं अनूसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समुदायों से होनी चाहिए।

वित्तीय मानदंड

क्र.सं. मद लाख रुपए में
अनावर्ती अनुदान
1. भवन निर्माण जिसमें वार्डन के लिए 2 कक्षों का आवास शामिल है। 100 बिस्तर वाले छात्रावास के लिए निर्दिष्ट विस्तृत मानदंडों के अनुसार राज्य अनुसूचित दर प्रयुक्त की जाएगी।
2. चार दिवारी
3. बोरिंग हैंड पम्प (1.00 लाख रुपए के अधीन राज्य पेयजल विभाग द्वारा निर्धारित न्यूनतम दर)
4. इलैक्ट्रिसिटी
5. रसोई उपकरणों सहित फर्नीचर, बिस्तर तथा उपकरण 6.91
आवर्ती अनुदान
1. खाद्य/आवास व्यय प्रति बालिका @ रुपए 850 प्रति माह 10.20
2. वार्डन का मानदेय @ 5,000 रुपए प्रति माह (अध्यापक के रूप में उसके वेतन के अतिरिक्त) 0.60
3. चौकीदार @ 3,000 रुपए प्रति माह 0.36
4. प्रमुख रसोइया (@ 3,000 रुपए प्रति माह) और 2 सहायक रसोइया (@ 2,500 रुपए प्रति माह) 0.96
5. इलैक्ट्रिसिटी/जल प्रति वर्ष 0.60
6. प्रति वर्ष अनुरक्षण 0.40
7. चिकित्सा देखभाल @ 750 रुपए प्रति वर्ष प्रति बालिका 0.75
8. शौचालय तथा स्वच्छता @ 100 रुपए प्रति माह प्रत्येक बालिका के लिए 1.20
9. समाचार-पत्र/मेगजीन तथा खेल @ 2,000 प्रत्येक बालिका के लिए 0.24
10. विविध 0.40
  कुल 15.71

लागत मानदंड़ों में संशोधन

आरंभ में चारदीवारी, बोरिंग हैंड-पम्प, इलैक्ट्रिसिटी, फर्नीचर और उपकरण इत्यादि सहित 100 बिस्तर वाले छात्रावास के निर्माण की अनुमत्य ईकाई लागत 42.5 लाख रुपए थी। मूल्यांकन प्रक्रिया के दौरान, अधिकांश राज्य सरकारों ने अपर्याप्त लागत मानदंडों के संबंध में अपनी चिंता व्यक्त की है और वरीयता में राज्य दर अनुसूची (एसओआर) के आधार पर लागत मानदंड बढ़ाने का अनुरोध किया है। इस मामले पर मंत्रालय में सावधानीपूर्वक विचार किया गया था और यह प्रस्ताव किया गया था कि बालिका होटल योजना के अधीन निर्माण लागत में संशोधन किया जाए ताकि राज्य दर अनुसूची के अनुसार छात्रावास में निर्माण की अनुमति दी जा सके। छात्रावासों के निर्माण के लिए लागत मानकों सहित बालिका छात्रावास योजना के कुछ मानकों में संशोधन करने के लिए क ईएफसी प्रस्ताव मार्च, 2011 में आईएफडी के माध्यम से वित्त मंत्रालय, व्यय विभाग को भेजा गया था ताकि ईएफसी की बैठक बुलाई जा सके। वित्त मंत्रालय ने दिनांक 30.05.2011 के अपने का.ज्ञा. द्वारा एक 100 बिस्तर वाले होस्टल के लिए विशिष्ट विस्तृत मानकों के अनुसार वर्ष 2009-10 तथा 2010-11 में पहले ही स्वीकृत छात्रावासों सहित छात्रावासों के निर्माण के लिए प्रयोग की जाने वाली राज्य दर अनुसूची के प्रति अपनी स्वीकृति संसूचित कर दी है।

भागीदारी पद्धति

केंद्रीय सरकार आवर्ती और गैर-आवर्ती परियोजना लागत का 90% वहन करेगी। 10% राज्य सरकारों द्वारा वहन किया जाएगा।

परियोजना अनुमोदन बोर्ड

मानव संसाधन विकास मंत्रालय में सचिव, स्कूल शिक्षा और साक्षरता की अध्यक्षता में एक परियोजना अनुमोदन बोर्ड विभिन्न राज्यों/संघ शासित प्रदेशों से प्राप्त प्रस्तावों की जांच करेगा। इस समिति में राज्यों/संघ शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों के अलावा, संयुक्त सचिव (माध्यमिक शिक्षा), संयुक्च सचिव एवं वित्तीय सलाहकार, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, योजना आयोग, वित्त मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और राष्ट्रीय महिला आयोग के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

कार्यान्वयन एजेंसी

इस योजना का कार्यान्वयन इस योजना के कार्यान्वयन के लिए स्थापित राज्य सरकारी समितियों द्वारा किया जाएगा। केंद्रीय सरकार का हिस्सा राज्य सरकारों को जारी किया जाता है जो इसे कार्यान्वयन एजेंसियों को जारी करती हैं। राज्य का उपयुक्त हिस्सा संबंधित राज्य सरकारों द्वारा कार्यान्वयन एजेंसियों को जारी किया जाता है।

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